कमरा, कब्र और मोटरसाइकिल

उन दिनों जब वो ख़ुशी को महसूस करने के लिए अपनी आँखें बंद करता, तो उड़ते गुब्बारों के बीच मासूम से बच्चे की मासूम मुस्कुराहट देखता। वो बहुत देर तक इस दृश्य को अपनी आँखों में कैद कर के रखना चाहता था। लेकिन ये दृश उसके आँख के स्क्रीन पर  पॉज नहीं होती। उसके आँखों में हरकत होती और उसे लगता की उसके पलकों पर एक मोटरसाइकिल तेज गति से दौड़ रही है। और उसके आँख के स्क्रीन में चल रहे उस दृश्य में एक तेज दौड़ती मोटरसाइकिल उस मासूम से बच्चे की मुस्कराहट लील जाती । आसमान में दूर तक उड़ गए गुबारे अचानक से फूट जाते । धीरे धीरे आसमान लाल होता फिर जमीन लाल हो जाती। उसकी ख़ुशी अवसाद में बदल जाती और वो अपनी आँखें खोल देता। वो घबराहट के मारे रोना चाहता पर उसके आंसूं नहीं गिरते। उसके आँखों से वो लाल आसमान वो लाल जमीन पिघल कर गिरने लगती।

उन दिनों जब वो ख़ुशी महसूस करने से डरने लगा था तब वो आँख बंद कर के दुःख महसूस करना चाहता था। वो आँखें बंद करता तब उसे एक ही शक्ल की सैकड़ों खूबसूरत लडकियां दिखाई देती। वो लडकियां खूबसूरत होती हैं पर उन्हें बदसूरत बनाने के लिए उनके बाल मुंड दिए गए होते हैं। उनके चेहरे पर कालिख पोत दी गई होती है। उनके खूबसूरत बदन पर जले कटे के निशान होते हैं। इन लड़कियों को जबरदस्ती हंसाने के लिए एक खूबसूरत सा लड़का सफ़ेद घोड़े पर सवार होकर आता और इन्हें गुदगुदी लगाकर जबरदस्ती हंसाने की कोशिश करता। वो लडकियां हंसती और उनके आंसू गिरते। लड़कियों की हंसने की आवाज ज्यो ज्यों तेज होती खूबसूरत सा दिखने वाला वो लड़का शैतान बनता जाता और उसका सफ़ेद घोड़ा मोटरसाइकिल की शक्ल अख्तियार करता। जब लड़कियों के आंसू से में वो लड़का डूब के मरने लगता तब लड़के की आँखे खुलती और उन लड़कियों के आंसू इसके आँख से किसी बागी हो चुकी नदी की तरह निकल जाती। उसके आँख से गिरे आंसुओं का स्वाद शराब के जैसा होता है जिसे पीकर वो कई महीनो तक सोता रहता।

उन दिनों वो अपने छोटे तंग से कमरे में अपने कैमरे , एक बेड, एक डायरी, एक कैनवास, एक मेज जिस पर कुछ रंग होते, एक मोटरसाइकिल जिसके पहिये लाल रंग के थे, के साथ रहता था। कमरे में न कोई खिड़की थी न कोई दरवाजा था। ऐसा न था की पहले उस कमरे में कोई दरवाजा या खिड़की नहीं थी । आम कमरों की तरह उसके कमरे में भी दो खिड़कियाँ और एक दरवाजा था। पर जैसे जैसे उसके दिल में कमरे से बाहर जाने का भय ताकतवर होता कमरे की खिड़कियाँ और दरवाजे गायब होते जाते। वो अपने कमरे में बैठा अपने कैमरे से अपने ख़ुशी और दुःख का चित्र खींचना चाहता। वो चित्र खींचकर उस बच्चे और उन लड़कियों को पहचाना चाहता था पर उसके लाख कोशिशो के बावजूद वो कभी चित्र नहीं खिंच सका। कैमरे से खींचे गए चित्र हमेशा लाल होते। वो कभी आँख बंद कर के कैनवास पर चित्र बनाने की कोशिश करता तो इतनी भयानक तस्वीर बन जाती की वो घंटो उस तस्वीर को देखकर रोता और चिल्लाता।

उसका कमरा बिलकुल ही शांत होता इतना शांत की उसे अपने सांस लेने की आवाज भी नहीं आती। कमरे में जो भी आवाज आती वो कमरे के छत से आती थी। वो अपने कमरे की छत से किसी पौधे की उगने की आवाज सुनता, कभी बारिश की आवाज सुनता, कभी कोई लड़की के रोने और गाने की आवाज सुनता, कभी किसी बच्चे के खिलखिलाने की आवाज सुनता। वो अपने कमरे की छत पर पहुंचना चाहता था पर उसे छत पर जाने का कोई रास्ता न मिलता। वो जब भी छत से कोई आवाज सुनता कमरे की दीवार पर दरवाजों के चित्र बनाने लगता। पर कभी उन दरवाजों से छत पर नहीं जा पाता। थक हारकर वो एक दिन कमरे में पड़ी मोटरसाइकिल पर बैठता है और ये छोटे हुए की तेज गति से मोटरसाइकिल चलाकर खुद को दीवार से टकराकर मार डालेगा। वो मोटरसाइकिल पर बैठता है और जोर से एक्सेलरेटर घुमाकर दीवार से टकराता है। एक जोर की आवाज होती है और वो मोटरसाइकिल सहित अपने कमरे की छत पर आ जाता है।

कमरे की छत, छत नहीं होती एक कब्र होता है जिसपे एक बड़ा सा पेड़ होता है। पेड़ की टहनियों पर एक झूला बंधा होता है जिसपे एक लड़की एक बच्चे को गोद में लिए गाने गाते हुए झूला झूल रही होती है। लड़की और बच्चे की शक्ल ठीक वैसी की वैसी होती है जैसी वो आँख बंद करने पर उन दो अलग अलग दृश्यों में देखता है। लड़का कुछ देर तक बिना कुछ कहे बच्चे और लड़की को एकटक निहारता है। वो आँख बंद कर के इस दृश्य को कैद करने की कोशिश करता है पर अबकी बार आँख बंद करने पर उसे चटख सफ़ेद रौशनी के अलावा कुछ नहीं दिखता। वो दुबारा जब आँखे खोलता है तो पेड़ पर झूला तो दिखता है पर वो बच्चा और लड़की नहीं दिखाई देते। वो उनको ढूँढने की कोशिश नहीं करता। वो एकदम शांत भाव से चेहरे पर कोई शिकन लाये बिना उस कब्र की छत से नीचे देखता है। नीचे कब्र में उसे अपना वो कमरा दिखाई देता है। जिसमे वो एक कैमरे, एक मोटरसाइकिल, एक डायरी और कैनवास को पकडे चैन की नींद सो रहा होता है।

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