शोर

“कमरे में एक लड़का है .एक लड़की है. कमरा अन्दर से बंद है.”

फुटनोट: एक कमरे में लड़का लड़की के बंद हो जाने का बाद कहानी अश्लील नहीं है.

लड़की, लड़के की बाहों में घर ढूंढ रही है. लड़का अपने पलकें तोड़कर घोसला बना रहा है. वो दोनों चुप हैं. खामोश है पर उनकी ऑंखें बोल रही है. लड़की अपने आँखों में एक लम्बी कहानी लिख रही है. लड़का, लड़की की होठों से नमी चुराकर अपनी आँखों में एक टेढ़ी मेरी कविता का चित्र बना रहा है. लड़की, लड़के के आँखों में एक बच्चा देखती है. बच्चा लड़की को देख के किलकारता है. लड़के की आँख बाहर आते-आते भीतर चली जाती है. लड़की, बच्चे की किलकारी को दुनिया की सबसे महान कविता की संज्ञा देती है और लड़के के कान में बुदबुदाती है तुम दुनिया के सबसे महान कवि हो”. लड़के के कान में शोर होता है. बहुत भयानक शोर. लोगो के चीखने-चिल्लाने का शोर. दुनिया खत्म करने पर अमादा पागल लोगों का शोर. दरवाजे पर धप्प धप्प का कानफोडू शोर. लड़का इस शोर में एक सपना देखता है. दरवाजे के उस पार के लोग आवारा लड़कियों के पेट से बच्चा काढ़कर दरवाजे पर फेंक कर रहे. लड़के का सपना टूट चूका है. दरवाजे पर धप्प धप्प का शोर लड़के के लिए अब असहनीय हो चुका है. लड़के की आँखें अब बाहर आ रही है. लड़के की आँख से वो बच्चा अब बाहर आ गया है. बच्चा रोने की बजाय जोर से हंसता है और लड़की की गोद में जाकर मर जाता है. लड़की चिल्ला रही है. दरवाजे पे धप्प धप्प का शोर बढ़ रहा है. एक भीड़ दरवाजा तोड़ कर अंदर दाखिल होती है. दुनिया भर के अजन्मे बच्चे अब लड़का- लड़की के शरीर पर अपनी कब्रे खोद रहे हैं. उन बच्चो को सोना है. उन्होंने दुनिया की जो भी हकीकत देखी है उस पर वो कहानियाँ लिखना चाहते हैं वो बच्चे कहानीकार बनना चाहते हैं, कवि बनना चाहते हैं, चित्रकार बनना चाहते हैं. वो जलपरियों के पूंछ पर बैठ बाँसुरिया बजाना चाहते हैं. वो सोना चाहते हैं. वो भीड़ का हिस्सा नहीं बनना चाहते. कमरे में दाखिल होने वाली भीड़, कमरे में कई दिन से सड़ रही दो लाशो के दुर्गन्ध को झेल नहीं पा रही है. वो उल्टियां कर रहें है, बेहोश हो रहे हैं. अजन्मे बच्चे जोर–जोर से हंस रहे हैं. दीवारें शर्म और शोर के दबाव में ढह रही है. भीड़ बेतहासा भाग रही है. लड़का और लड़की अपने आँखों में बना रहे हैं पालने.

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5 thoughts on “शोर

  1. अरहान सर को इस लेख की बधाई। जो भी पढ़ेगा-समझेगा आपका कर्जदार हो जाएगा। _/\_

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  2. दुनिया भर के अजन्मे बच्चे अब लड़का- लड़की के शरीर पर अपनी कब्रे खोद रहे हैं. उन बच्चो को सोना है. उन्होंने दुनिया की जो भी हकीकत देखी है उस पर वो कहानियाँ लिखना चाहते हैं वो बच्चे कहानीकार बनना चाहते हैं, कवि बनना चाहते हैं, चित्रकार बनना चाहते हैं. वो जलपरियों के पूंछ पर बैठ बाँसुरिया बजाना चाहते हैं. वो सोना चाहते हैं. वो भीड़ का हिस्सा नहीं बनना चाहते. कमरे में दाखिल होने वाली भीड़, कमरे में कई दिन से सड़ रही दो लाशो के दुर्गन्ध को झेल नहीं पा रही है. वो उल्टियां कर रहें है, बेहोश हो रहे हैं ….waah such a powerful write up..

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