कल्पवृक्ष

लम्बी कहानी

दूर से देखने पर उस जगह के बारे में कोई भी यह अंदाजा लगा सकता था कि वो जगह बहुत भीड़ वाली है। बेशक वो जगह भीड़ भाड़ वाली थी लेकिन उस जगह पर सभी लोग पंक्तियों में रखी गयी कुर्सियों पर बहुत शांति से बैठे थे मानो उन्हें किसी भी चीज की जल्दी न हो, जैसे वो कुर्सी पर बैठे ही अनन्त तक वक़्त काट सकने की इच्छा रखते हो।

ये जगह वो जगह थी जहां मर जाने वाले लोग इस बात की प्रतीक्षा करते थे कि उन्हें स्वर्ग में दाखिला मिलेगा या नरक में या फिर तुरन्त ही उनका पुनर्जन्म होगा या फिर लम्बे समय तक वो इस वेटिंग हॉल में बैठे किसी फैसले का इंतजार करते रहेंगे। ये हॉलनुमा जगह बहुत बड़ी थी।इस जगह सिर्फ कुर्सियां थी जिसपे लोग बैठे हुए थे। कुछ कुर्सियां खाली भी थी। हर सौ कुर्सी पर एक केबिननुमा कांच का कमरा था। कमरे के ऊपर बड़े अक्षरों में भारत की सभी भषाओं में पूछताछ केंद्र लिखा हुआ था। यह हॉल सिर्फ भारतीय लोगो के लिए था और हॉल में जगह जगह पर भारतीय भाषाओं में दिशा निर्देश लिखे हुए थे। हर कुर्सी पर एक मोटी सी मैन्युअल बुक भी थी जिसमे उस जगह से जुड़ी हर तरह की जानकारी और निर्देश लिखे थे।

एक्स को इस जगह आये हुए अभी कुछ ही समय हुए थे। वो एक बड़े लिफ्ट से इस हॉल में दाखिल हुआ था और एक खाली कुर्सी देखकर बैठ गया था। उसकी कुर्सी के पीछे की तीन कुर्सियी पर 2 औरते अपनी गोद मे सर रखकर सो रही थी। उनके बगल में एक 16 सत्रह साल का लड़का भी अपने चेहरे को अपनी गोद मे रखकर सो रहा था। उसने सोचा कि ये तीनो शायद बहुत देर से यहां है और थककर सो गए हैं। उसने उन तीनों से ध्यान हटाते हुए कुर्सी पर बैठ उस बड़ी सी मैन्युअल बुक को अनमने ढंग से पढ़ रहा था। उसकी जो सबसे हालिया यादाश्त थी उसके हिसाब से वो किसी चलती ट्रेन के दरवाजे से गिर के मर गया था। उसके मरने में उसकी कोई लापरवाही नही थी। पीछे से किसी सहयात्री ने गलती से धक्का दे दिया था। उसे मर जाने का ज्यादा दुःख नही था। ट्रेन पर बैठकर वो अपने तलाकशुदा पत्नी के घर जा अपने 17 साल के बेटे से मिलने जा रहा था। उस बेटे से जिस बेटे को अपने पिता का चेहरा भी देखना भी नसीब नही था। वो ये सब सोच के अपनी आंखें नम ही कर रहा था कि हाल में एक लड़की की बहुत ही मीठी पर मशीनी आवाज गूंजी “यहां अपने पिछली जिंदगी को याद करना मना है। जो व्यक्ति भी ऐसा करने की कोशिश करता है उसके खाते में 5000 सीन जोड़ दिए जाएंगे”। उसने ये आवाज सुनकर अपनी दूर से देखने पर उस जगह के बारे में कोई भी यह अंदाजा लगा सकता था कि वो जगह बहुत भीड़ वाली है। बेशक वो जगह भीड़ भाड़ वाली थी लेकिन उस जगह पर सभी लोग पंक्तियों में रखी गयी कुर्सियों पर बहुत शांति से बैठे थे मानो उन्हें किसी भी चीज की जल्दी न हो, जैसे वो कुर्सी पर बैठे ही अनन्त तक वक़्त काट सकने की इच्छा रखते हो।

ये जगह वो जगह थी जहां मर जाने वाले लोग इस बात की प्रतीक्षा करते थे कि उन्हें स्वर्ग में दाखिला मिलेगा या नरक में या फिर तुरन्त ही उनका पुनर्जन्म होगा या फिर लम्बे समय तक वो इस वेटिंग हॉल में बैठे किसी फैसले का इंतजार करते रहेंगे। ये हॉलनुमा जगह बहुत बड़ी थी।इस जगह सिर्फ कुर्सियां थी जिसपे लोग बैठे हुए थे। कुछ कुर्सियां खाली भी थी। हर सौ कुर्सी पर एक केबिननुमा कांच का कमरा था। कमरे के ऊपर बड़े अक्षरों में भारत की सभी भषाओं में पूछताछ केंद्र लिखा हुआ था। यह हॉल सिर्फ भारतीय लोगो के लिए था और हॉल में जग्ग जगह पर भारतीय भाषाओं में दिशा निर्देश लिखे हुए थे। हर कुर्सी पर एक मोटी सी मैन्युअल बुक भी थी जिसमे उस जगह से जुड़ी हर तरह की जानकारी और निर्देश लिखे थे।

एक्स को इस जगह आये हुए अभी कुछ ही समय हुए थे। वो एक बड़े लिफ्ट से इस हॉल में दाखिल हुआ था और एक खाली कुर्सी पर बैठ गया। वो कुर्सी पर बैठ उस बड़ी सी मैन्युअल बुक को अनमने ढंग से पढ़ रहा था। उसकी जो सबसे हालिया यादाश्त थी उसके हिसाब से वो किसी चलती ट्रेन के दरवाजे से गिर के मर गया था। उसके मरने में उसकी कोई लापरवाही नही थी। पीछे से किसी सहयात्री ने गलती से धक्का दे दिया था। उसे मर जाने का ज्यादा दुःख नही था। ट्रेन पर बैठकर वो अपने तलाकशुदा पत्नी के घर जा अपने 17 साल के बेटे से मिलने जा रहा था। उस बेटे से जिस बेटे को अपने पिता का चेहरा भी देखना भी नसीब नही था। वो ये सब सोच के अपनी आंखें नम ही कर रहा था कि हाल में एक लड़की की बहुत ही मीठी पर मशीनी आवाज गूंजी “यहां अपने पिछली जिंदगी को याद करना मना है। जो व्यक्ति भी ऐसा करने की कोशिश करता है उसके खाते में 5000 सीन जोड़ दिए जाएंगे”। उसने ये आवाज सुनकर अपनी पिछली जिंदगी के बारे में सोचना बंद कर दिया और मैन्युअल बुक पढ़ने लगा।

उसने मैन्युअल बुक में पढ़ा कि यहां हर गलती पर जुर्माने के रूप में व्यक्ति के खाते में सीन जोड़े जाते है। उस सीन के आधार पर ही व्यक्ति को स्वर्ग या नरक में भेजा जाता है। उसने मैन्युअल में ही एक जगह पढ़ा कि जिस व्यक्ति को भी शराब पीने की इच्छा है वो टोकन काउंटर से 1 करोड़ सीन का टोकन लेकर हाल के आखिरी छोर में बने बार मे शराब पी सकता है। वो शराब नही पीता था लेकिन शराब की इतनी कीमत देखकर उसे बहुत ताज्जुब हुआ साथ ही साथ खुशी भी की वो शराब नही पीता।

उसे इस हाल में आये 2 घण्टे हो गए थे। इतने देर में न तो उस से जुड़ा कोई फैसला आया ना ही उसके आजु बाजू के कुर्सी पर कोई नया व्यक्ति आया। वो उस कुर्सी पर शून्य की अवस्था में कुछ भी न सोचने की कोशिश कर रहा था तभी उसके दायीं तरफ की कुर्सी पर एक दुबला सा घबराया शख्श बैठा।

नया आया आदमी मैन्युअल बुक पढ़ने में मशगूल था । एक्स उस से बात करने की सोच रहा था लेकिन क्या बात करे उसे समझ नही आ रहा था। बहुत देर बाद उसने उसके जेब W से शूरू हुए एक लंबे से कोड को देखते हुए पूछा

“भाई, तुम कैसे मरे”
“मलेरिया से” W ने थोड़ी देर बाद चेहरे पर एक बासी मनहूसियत लाते हुए कहा।

एक्स कुछ देर तक मन ही मन हंसा। उसे W की बात बहुत अजीब लगी। “आज के दौर में भला कोई मलेरिया से कैसे मर सकता है। मुझे भी कई दफा मलेरिया हुआ है पर मैं मलेरिया से थोड़े मरा। जब भी कभी तबियत खराब हुई शालू ने दिन रात एक कर के मेरी सेवा की। शालू वो शालू जो अपर्णा को फूटी आंख भी नही सुहाती थी। इसी वजह से तो उसके और अपर्णा के बीच तलाक हुआ” । वो ये सब सोच ही रहा था कि दुबारा उस लड़की की मशीन आवाज हॉल में गूंजी। “यहां अपने पिछली जिंदगी को याद करना मना है। जो व्यक्ति भी ऐसा करने की कोशिश करता है उसके खाते में 5000 सीन जोड़ दिए जाएंगे”।

आवाज सुनने के बाद उसने W को इस जगह वो सारे नियम कानून बता दिए जिसे उसने मैन्युअल बुक में पढ़ी थी। एक्स जब W को शराब वाली बात बता रहा था तब W की आंखों में चमक आयी थी। कुछ देर एक्स W से मैन्युअल बुक दे जुड़ी बातें कर एक्स चुप हो गया। अभी तक W ने एक्स से अपनी तरफ से कोई बात नही की थी। शायद W मलेरिया की वजह से मर जाने की बात से अपमानित महसूस कर रहा था इसलिए कोई भी बात शुरू करने से कतरा रहा था।उसे डर था कि एक्स उस से उसके परिवार के बारे में न पूछ लें। कही एक्स उस से ये पूछ लें कि जब उसे मलेरिया हुआ था तब उसकी बीवी कहाँ थी। वो एक्स से क्या कहता कि जब उसे मलेरिया हुआ तब उसकी बीवी शालू ऑफिस के काम के सिलसिले में मुम्बई चली गयी थी। उसे ये पता था कि शालू दिल्ली में ही है। अपने बॉस अमन के साथ। वो मलेरिया की वजह से कम शालू की वजह से ज्यादा मरा था।

एक्स चुपचाप बैठा सामने की स्क्रीन पर फ़्लैश होते नोटोफोकेशन को देख रहा था। स्क्रीन पर वहुत जल्दी जल्दी कई भाषाओ में X987456344826 has arrived. जैसे कई नोटिफिकेशन आ रहे थे। ये शायद उनलोगों के कोडनुमा नाम थे जो अभी अभी मरकर वेटिंग रूम में आये थे। एक्स को यह देखकर वहुत अच्छा लगा कि यहां उर्दू में भी संदेश आ रहे है। एक्स को उर्दू से बहुत लगाव था। उसने शालू के लिए कई बार शायरियां भी लिखी थी। जब एक्स की पहली किताब छपी थी तब शालू बहुत खुश हुई थी। उसने एक्स को अपनी बाहों में भरकर कहा था “अब तो तुम लेखक भी हो गए अमन। कोई यह मान भी सकता है की इतनी बड़ी कॉर्पोरेट कंपनी के सीईओ अमन शर्मा उर्दू का इतना बड़ा शायर भी है”। एक बार फिट से उस लड़की की मशीनी आवाज गूंजी “यहां अपने पिछली जिंदगी को याद करना मना है। जो व्यक्ति भी ऐसा करने की कोशिश करता है उसके खाते में 5000 सीन जोड़ दिए जाएंगे”। एक्स थोड़ा खीज गया और फिर से कुर्सी पर बैठ मैन्युअल बुक के पन्ने पलटने लगा।

वो मैन्युअल बुक से उकताकर बायीं तरफ देख ही रह था कि एक नया शख्श बायीं कुर्सी पर बैठ गया। इस शख़्स के जेब पर मौजूद T से शुरू होता था। T को देखते ही एक्स की भौवें तन गयी। दोनो की नजरें मिली। T भी एक्स को देखा और चेहरे पर पश्चाताप की भावना लाते मैन्युअल बुक पलटने लगा। W भी T को देखकर चौंका इस से पहले W T से कुछ कहता एक्स ने T से एक बहुत ही ज्यादा भावनाविहीन आवाज में कहा “बहुत जल्दी आ गए, उन लोगो ने तुम्हे मार दिया क्या?

T कुछ देर चुप रहा फिर चेहरे दुख के सबसे उत्कृष्ट भाव को चेहरे पर लाते हुए कहा ” उस दिन ट्रेन से कटकर मैंने आत्म हत्या कर ली”
“एक अनजाने में हुए कत्ल का इतना बड़ा प्रायश्चित” एक्स ने चेहरे पर आने वाली मुस्कुराहट की हल्की सी रेखा को खींचते हुए पूछा।
“सॉरी मैं उस दिन नशे में था” इतना कहकर T चुप हो गया।

W को अबतक उनकी बातें समझ आ गयी थी । तीनों कुछ देर खामोश रहे और फिर साथ उठकर टोकेन काउंटर के पास पहुंचे। वह उन्हीने 1 लाख सीन का टोकन लिया और कंधे से कंधा मिलाकर शराबखाने की तरफ बढ़ गए।

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