अधूरी कहानियां

कहानियाँ बुनना उसके लिए कभी भी आसान नहीं रहा था. वो अक्सर कहानी लिखते लिखते कहानी के बीच में ऐसी जगह आकर फंस जाता था जहाँ से वो निकल नहीं पाता था. वो कहानी लिखने वाले उन गिने चुने लोगो में से एक था, जो अक्सर अपनी ही कहानी के किसी किरदार में इस तरह गुम हो जाते थे की कहानी अधूरी रह जाती थी. उसने कई अधूरी कहानियाँ लिखी थी, पर किसी भी को पूरा नहीं किया था. वो अपनी हर एक कहानी में कहीं-कहीं अटका सा हुआ था. ठीक उसी तरह जैसे किसी शाख पर एक पतंग लटक जाती है या फिर जैसे किसी के होठों पर पहले प्रेम का पहला चुम्बन ताउम्र किसी प्रेत की तरह लटका  हुआ रहता है.

कुछ दिन पहले उसने एक कहानी लिखने की कोशिश की थी. उस कहानी में वो एक दिन रात के ढाई बजे फ्रीज से पानी निकालकर पानी पी रहा था. उस दिन उसके लिए फ्रीज का ठंडा पानी भी किसी तेज़ाब से कम नहीं था. पानी उसके सीने में उतरता तो था पर पानी की तरह नही किसी शापित ज्वालामुखी के पिघले लावे की तरह. उस दिन जब दो बोतल पानी पीने के बाद भी उसकी प्यास नहीं बुझी तो वो लड़खड़ाकर गिरने लगा. अमूमन लड़खड़ाने के बाद आदमी जमीन पर गिरता है. हाँ, कुछ खुशनसीब लोग होते हैं जो लड़खड़ाने के बाद सीधे अपने चाहनेवाले के बाहों में जाकर गिरते हैं. वो उस दिन न तो इनता बदनसीब था की जमीन पर गिर कर अपना सर फोड़ लेता न ही इतना ही खुशनसीब था की वो किसी के बाहों में गिरता. वो लड़खड़ाने के बाद सीधे एक सपने में जा गिरा. एक लड़की के आखिरी बार  बंद आँखों से देखे गए सपने में.

उस सपने में वो एक कमरे में मेज पर बैठा उसी लड़की का सपना लिख रहा था जिसके सपने में वो गिरा था. सपने वाले कमरे के एक हिस्से में चटख धुप उगी थी, दुसरे हिस्से में घने कुहरे के बीच  बर्फ गिर रही थी. वो कमरे के बीचो बीच मेज पर बैठा था जहाँ बहुत तेज  बारिश हो रही थी. मेज पर लिखने के लिए न कोई स्याही थी न कोई कलम. मेज पर बस एक कागज का टुकडा, शराब से भरा ग्लास और एक सिगरेट से भरी सिगरेट की डिब्बी पड़ी थी. उसने लड़की का  सपना शराब और सिगरेट की मदद से लिखना शुरू कर दिया. सपना पूरी तरह से पूरा  लिखने के बाद. वो मेज पर यूँ ही कुछ देर बैठा रहा. कागज पर लिखे गए सपने के सारे शब्द शराब में डूबे थे इसलिए वो ज्यादा देर तक कागज  पर न टिके और जिस तरह मुट्ठियों से रेत फिसलती  है, वो भी कागज से फिसल कर फर्श गिर  गये.

जब कागज पर लिखे गए सपने के सरे शब्द, सारे अक्षर एक एक  कर फर्श पर बिखर गये तब कमरे में अचानक से एक गहरा अन्धेरा छा गया हो. ऐसा अन्धेरा  मानो जैसे सूरज और आग समेत दुनिया की हर चमकने वाली चीज एकाएक बुझ गयी हो. उसने उस अँधेरे में उन शब्दों को उठाकर फिर से कागज पर सजाने की कोशिश की पर किसी चीज से टकराकर वो गिर गया.

जब उसकी आँखें खुली तो उसने खुद को फ्रीज के पास ही औंधे मुह गिरा पया. उसके सर पर गहरी चोट लगी थी पर खून नही बह रहा था. दुनिया की सबसे गहरी चोटें लगने पर खून नही बहता. वो सर सहलाते हुए अपने कमरे में आया. उसे नींद न आने की बीमारी थी. उसने अँधेरे में ही बिस्तर  के बगल वाले टेबल के ड्रावर में हाथ डालकर नींद की दवा निकलने की कोशिश की पर उसमे नींद की दवा वाली डिब्बी नही थी. उसने बिस्तर के बगल में रोज सोने वाली लड़की  को हाथ से टटोलकर जगाने की कोशिश की पर वहां कोई लड़की नहीं थी.

नींद की दवा और रोजाना बगल में सोने वाली लड़की को न पाकर वो अपने दुसरे कमरे में गया जहां वो अधूरी कहानियां लिखा करता था. उस कमरे में मेज के सामने वाली कुर्सी पर वही लड़की अपने  सर को मेज पर टिकाकर बैठी थी. मेज की बायीं तरफ नींद की दवा की खुली  डिब्बी थी जिसमें कोई दवा नहीं थी. मेज की बायीं तरफ कागज पर एक लड़की ने अपना सपना लिखा था. सपने के नीचे लड़की ने अलविदा नामक एक दुखी शब्द भी लिखा था. उसने लड़की को एक बार अपनी बाहों में भरा. पर ये जानकर की वो अब लड़की नही बस एक शरीर है उसने लड़की को उसी मेज पर छोड़ दिया. ऐसे मौको पर आदमी या तो गूंगा हो जाता है या फिर जोर से चींखता है. वो न तो गूंगा हुआ ना ही उसके हलक से कोई चीख निकली. उसने मेज पर रखी एक सिगरेट अपने होठों पर सुलगाकर एक पुराने हिंदी फिल्म का प्रेमगीत गुनगुनाते हुए बालकनी के पास चला आया. सिगरेट खत्म करने के बाद उसने ग्यारहवी मंजिल की उस इमारत के बालकनी से छलांग लगा दी.

बालकनी से नीचे गिरते समय उसे पूरा यकीन था की इस बार भी वो उसके सपने में ही जाकर गिरेगा. इस बार वो उस लड़की का सपना जरूर पूरा करेगा और अपनी सारी अधूरी कहानियां भी पूरी कर लेगा. बालकनी से छलांग लगाते समय उसने ये नही सोचा था की उसे अपने सपने में देखने वाली आँखें अब हमेशा के लिए बंद है.

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