एक कॉकरोच की मौत

यूँ आदमी दिखता है कि वो एक समय में एक ही जगह है पर इस बात की बहुत ज्यादा संभावनाएं होती है कि वो एक ही समय में दो या दो से ज्यादा जगहों पर होता है। जैसे एक बच्चा दिखता तो है कि वो गणित की कक्षा में जोड़ घटाव के सवालों को हल कर रहा है पर असल मे वो उस समय अपने घर के किचन में स्टूल लगाकर ऊंचे वाले स्लैब से चीनी चुराने में मशगूल रहता है। ये बहुत ही ज्यादा मुमकिन होगा की यही बच्चा जवान होने पर अपने दफ्तर में लैपटॉप पर आंखें गड़ाए दिखेगा पर वो दफ्तर से कहीं दूर किसी कैफे में अपनी माशूका के साथ होगा।

उसे इस बात पर पूरा यकीन था कि आदमी एक समय एक से ज्यादा जगहों पर हो सकता है। शायद यही वजह थी कि वो एक तरफ एक अस्तपाल के आईसीयू में एक बेड पर कोमा की अवस्था के पड़ा था दूसरी तरफ किसी और दुनिया में एक बहुत बड़े और गहरे बेसमेंट की पहली सीढ़ी पर कॉकरोच बन कर खड़ा था।

दूसरी दुनिया में वो कॉकरोच जरूर था पर उसे पता था कि उसकी आत्मा इंसान की ही है। बस वो एक कॉकरोच के शरीर में है। जैसे ही वो इस बेसमेंट की गहराई में नजर आ रहे वॉर्महोल तक पहुंचेगा वो फिर से इंसान बन जायेगा। इसलिए वो कोशिश कर रहा है और धीरे-धीरे बेसमेंट की गहराई को पार कर रहा है।

इधर पहली दुनिया के आईसीयू में वो एकदम निर्जीव सा पड़ा है। उसके आंखों के सामने एक घना सा अंधेरा, ठीक वैसा ही अंधेरा जैसे दूसरी दुनिया के उस बेसमेंट में है जहां वो कॉकरोच की भूमिका में है। उस कॉकरोच की भूमिका में जो आज 6 महीने बाद उस बेसमेंट की गहराई में बने वॉर्महोल तक पहुंच गया है। वो कॉकरोच वॉर्महोल के जितना करीब आते जाता है, पहली दुनिया के आईसीयू में कोमा में पड़े उस शख्श के शरीर में हरकत होती है। वो कॉकरोच अब वॉर्महोल में प्रवेश कर चुका है। वॉर्महोल आने के बाद भी वो कॉकरोच ही है। जैसा उसने सोचा था कि वो दुबारा इंसान बन पाएगा वैसा कुछ नही हुआ। हां, ये अलग बात है कि वो अब किसी बेसमेंट में न होकर एक हॉस्पिटल के आईसीयू में है। जहां एक आदमी एक नर्स पर धीमी आवाज में डांट रहा है “यहां कॉकरोच कैसे आया। इतने बड़े हॉस्पिटल के आईसीयू में कॉकरोच कैसे आ सकता है। क्या मैंने अपनी जिंदगी की आधी कमाई इसी लिए खर्च की है” नर्स उस आदमी की बात और कॉकरोच को देखकर घबरा गई। अगर वो लड़की नर्स नही होती तो अबतक कोमा में पड़े शख्श के भाई के गले से चिपक गयी होती। पर वो लड़की, लड़की कम एक नर्स ज्यादा थी इसलिए वो कॉकरोच को देखकर जोर से चिल्लाई नही। बस अपने पैरों में थोड़ी से हरकत लाकर उस कॉकरोच को मसल दिया।

उस दिन कॉकरोच के मसले जाने के कुछ सेकंड बाद ही कोमा में पड़े शख्श की मौत हो गयी। उसका भाई कुछ देर तक चुप रहा और फिर उस नर्स से लिपट कर बिना किसी आवाज के रोने लगा।

आदमी को कभी भी एक ही समय में एक हीं जगह पर दो दो बार नही होना चाहिए।

(फ्रांज काफ्का से प्रेरित रचना उन्हीं के लिए)

फोटो साभार: Joe Green

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